स्टेट पेज – जशपुर – सुनील सिन्हा :-
जशपुर जिले में गौवंश तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन शंखनाद के तहत पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 65 गौवंशों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया है। बगीचा थाना क्षेत्र के ग्राम खंटाडांड़ में शनिवार तड़के पुलिस ने एक कंटेनर ट्रक को रोककर तलाशी ली, जिसमें गौवंशों को बेहद अमानवीय तरीके से ठूंस-ठूंसकर भरा गया था। इनमें से दो गौवंशों की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने मौके से कंटेनर चालक रेहान अंसारी (34 वर्ष), निवासी ग्राम सिसई, जिला गुमला, झारखंड को गिरफ्तार किया है। तस्करी में प्रयुक्त कंटेनर ट्रक के साथ गौ-तस्करी के लिए रास्ते की रेकी कर रही एक मारुति सुजुकी एस-प्रेसो कार को भी जब्त किया गया है। कार सवार आरोपी फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है।
मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने की घेराबंदी
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक झा ने जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में आपराधिक गतिविधियों और तस्करी पर लगातार निगरानी रखते हुए समन्वित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में डीआईजी एवं जशपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के नेतृत्व में मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर तस्करी के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है।
इसी दौरान जशपुर पुलिस को सूचना मिली कि कंटेनर ट्रक क्रमांक NL-01-AB-7655 में बड़ी संख्या में गौवंशों को भरकर अंबिकापुर की ओर से बगीचा के रास्ते झारखंड ले जाया जा रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसडीओपी जशपुर निमितेश सिंह, निरीक्षक कृष्ण कुमार साहू, उप निरीक्षक विवेक कुमार भगत और बगीचा थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की योजना बनाई।
पुलिस टीम ने बगीचा थाना क्षेत्र के ग्राम पेटा में नाकाबंदी कर संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू की। इसी दौरान 10 अक्टूबर की सुबह करीब 4:30 बजे संदिग्ध कंटेनर वहां पहुंचा। पुलिस को देखकर चालक ने वाहन रोकने के बजाय दूसरे रास्ते से तेजी से भागने का प्रयास किया। पुलिस टीम ने पीछा करते हुए ग्राम खंटाडांड़ में कंटेनर को रोक लिया।
कंटेनर में ठूंसकर भरे थे 65 गौवंश, दो मृत मिले
कंटेनर की तलाशी लेने पर उसमें कुल 65 गौवंश पाए गए। पशुओं को बेहद तंग जगह में ठूंस-ठूंसकर भरा गया था, जिससे उनके साथ अमानवीय व्यवहार किए जाने की स्थिति सामने आई। इनमें से दो गौवंशों की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने चालक से पशुओं के परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज मांगे, लेकिन वह कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
इसके बाद पुलिस ने गवाहों की मौजूदगी में सभी गौवंशों को बरामद किया। पशु चिकित्सक से उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और मृत गौवंशों का विधिवत अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस ने आरोपी चालक को गिरफ्तार कर तस्करी में इस्तेमाल कंटेनर ट्रक को जब्त कर लिया।
तस्करी के रास्ते की रेकी कर रही कार भी जब्त
पुलिस की कार्रवाई में गौ-तस्करी के नेटवर्क से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण कड़ी भी सामने आई है। गौवंशों की तस्करी के लिए रास्ते की रेकी कर रही मारुति सुजुकी एस-प्रेसो कार क्रमांक JH-01-BR-9492 को भी जब्त किया गया है। कार सवार आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी पहचान और तलाश में जुटी है।
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी रेहान अंसारी ने बताया कि वह कंटेनर में गौवंशों को लेकर अंबिकापुर की ओर से झारखंड जा रहा था। पुलिस को मामले में अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता के संबंध में भी जानकारी मिली है। तस्करी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान और पतासाजी की जा रही है।
विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज
पुलिस ने आरोपी रेहान अंसारी के विरुद्ध बगीचा थाने में अपराध क्रमांक 264/26 दर्ज किया है। उसके खिलाफ छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 4, 6 एवं 10, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11(1)(क)(घ) तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 325 के तहत कार्रवाई की गई है। मामले में आगे की विवेचना जारी है।
जनवरी से अब तक 1108 गौवंश मुक्त, 131 आरोपी गिरफ्तार
जशपुर पुलिस के अनुसार, डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के नेतृत्व में जनवरी 2026 से अब तक गौ-तस्करी के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की गई है। इस दौरान जिले में 98 प्रकरणों में कार्रवाई करते हुए कुल 1108 गौवंशों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया गया है। इन मामलों में 131 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है। इसके अलावा गौ-तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे ट्रक, पिकअप सहित कुल 36 वाहनों को जब्त किया गया है।
पुलिस का कहना है कि गौवंशों के अवैध परिवहन में शामिल लोगों के साथ-साथ तस्करी के पूरे नेटवर्क पर भी निगरानी रखी जा रही है। पशुओं के साथ क्रूरता करने और अवैध परिवहन में संलिप्त लोगों के विरुद्ध अभियान आगे भी जारी रहेगा।
इस कार्रवाई में एसडीओपी जशपुर निमितेश सिंह, निरीक्षक कृष्ण कुमार साहू, उप निरीक्षक विवेक भगत, सहायक उप निरीक्षक नरेश मिंज तथा आरक्षक आशीष तिर्की, रमेश गृही और सुधीर मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।






